कभी कभी तो लगता है कि
ज़िन्दगी और फेसबुक दोनों में कोई फर्क ही नहीं है....कई फेस्बुकिया
फीचर्स हमारे जीवन में भी नज़र आते हैं...अपनी ज़िन्दगी में जब कोई समस्या
या दुःख का स्टेटस उपडेट हो जाता है...तो काफी मित्र...और सगे
सम्बन्धी...या तो चुपचाप से सरसरी नज़र मारकर बच कर निकल जाते हैं...और
दोबारा आपके दुखी प्रोफाइल पर विजिट ही नहीं करते.... कुछ दोस्त और
सम्बन्धी होते हैं...जो आपकी स्थिति को " Like " कर के निकल जाते
हैं...कुछ मित्र और नजदीकी जो कि मुरव्वत वाले होते हैं.....वो
कुछ देर रुक कर आपकी स्थिति पर दुःख जताते हुए फार्मल कमेन्ट भी करते
हैं...और फिर निकल लेते हैं...मगर ...उस दुःख या समस्या के निराकरण के लिए
कोई समाधान बताने देर तक आपके प्रोफाइल पर नहीं रुकता.....कारण साफ़
है...आज के इस दौर में सब यही सोचते नज़र आते हैं कि यदि लोग इन हुए
हैं....तो फिर दूसरे के प्रोफाइल में क्यों समय खराब करें.....लोग इन का
भरपूर उपयोग अपनी ज़िन्दगी के प्रोफाइल...और अपने (सामजिक स्तर) स्टेटस
के लिए क्यों नहीं करें...? उन सबको अपने अपने प्रोफाइल की चिंता लगी रहती
है....उनको अपने अपने स्टेटस अपडेट जो करना होते हैं...! यहाँ हम समयाभाव
का कह सकते हैं...जो कि जायज़ भी है...ज़िन्दगी में भी...और फेसबुक पर
भी...दोनों जगह...यही मुख्य समस्या नज़र आती है...कई मित्र दोनों ही जगह यही
शिकायत करते मिल जाते हैं...!
और कुछ फेस्बुकिया फीचर्स हमारे दैनिक जीवन में दिखाई दे जाते हैं...."POKE" को हे ले लीजिये.....बाज़ार में माल में..गार्डन में...कहीं भी कई बार कोई लड़की किसी लड़के को....और कई लड़के किसी लड़की को "POKE" करते हुए मिल जायेंगे....और तो और कभी हम भी बन ठन कर अच्छा सा स्टेटस अपडेट show कर देते हैं...तो आज भी हम को सुंदरियों के एक दो "POKE" तो मिल ही जाते हैं, ..इसके अलावा....हम दैनिक जीवन में कई अवांछित लोगों को "BLOCK" भी करते हैं....और जिस से खुन्नस है...उसको "UN FRIEND" भी कर डालते हैं...! और अंत में सबसे विचित्र फेस्बुकिया फीचर जो कि हमारे जीवन में आदि काल से चला आ रहा है...वो है..."SUBSCRIBER" ...जी हाँ...यह वो लोग होते हैं...जो ना तो आपके सम्बन्धी होते हैं...और न ही आपकी मित्र मंडली में होते हैं...मगर यह आपकी हर गतिविधि को बड़ी चतुराई से देखते...पढ़ते हैं...और आप इन से बेखबर होते हैं...यह आपके हर अपडेट को पूरे मोहल्ले में शेयर भी कर डालते हैं...TAG कर डालते हैं... यह आपके ...हमारे मोहल्ले और पड़ोस में रहने वाली चुगलखोर आंटी की तरह ही तो होते हैं...! देखिये...आगे और क्या क्या नए फेस्बुकिया फीचर्स आते हैं...जो कि हमारे दैनिक जीवन में...कहीं न कहीं...एक जैसे प्रभाव रखते हों...!!
और कुछ फेस्बुकिया फीचर्स हमारे दैनिक जीवन में दिखाई दे जाते हैं...."POKE" को हे ले लीजिये.....बाज़ार में माल में..गार्डन में...कहीं भी कई बार कोई लड़की किसी लड़के को....और कई लड़के किसी लड़की को "POKE" करते हुए मिल जायेंगे....और तो और कभी हम भी बन ठन कर अच्छा सा स्टेटस अपडेट show कर देते हैं...तो आज भी हम को सुंदरियों के एक दो "POKE" तो मिल ही जाते हैं, ..इसके अलावा....हम दैनिक जीवन में कई अवांछित लोगों को "BLOCK" भी करते हैं....और जिस से खुन्नस है...उसको "UN FRIEND" भी कर डालते हैं...! और अंत में सबसे विचित्र फेस्बुकिया फीचर जो कि हमारे जीवन में आदि काल से चला आ रहा है...वो है..."SUBSCRIBER" ...जी हाँ...यह वो लोग होते हैं...जो ना तो आपके सम्बन्धी होते हैं...और न ही आपकी मित्र मंडली में होते हैं...मगर यह आपकी हर गतिविधि को बड़ी चतुराई से देखते...पढ़ते हैं...और आप इन से बेखबर होते हैं...यह आपके हर अपडेट को पूरे मोहल्ले में शेयर भी कर डालते हैं...TAG कर डालते हैं... यह आपके ...हमारे मोहल्ले और पड़ोस में रहने वाली चुगलखोर आंटी की तरह ही तो होते हैं...! देखिये...आगे और क्या क्या नए फेस्बुकिया फीचर्स आते हैं...जो कि हमारे दैनिक जीवन में...कहीं न कहीं...एक जैसे प्रभाव रखते हों...!!
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