गुरुवार, 30 मार्च 2017

शरीक-ए-हयात को मिला राजस्थान उर्दू अकादमी का प्रतिष्टित अवार्ड !!


मेरे लिए और बेटियों के लिए कल 29 मार्च 2017 का वो यादगार और फख्र का दिन था जब जयपुर में राजस्थान उर्दू अकादमी द्वारा मेरी शरीक-ए-हयात, राजकीय महाविद्यालय में उर्दू की व्याख्याता और विभागाध्यक्ष डा. हुस्न आरा को उर्दू अदब की खिदमात के लिए दर्स-ओ-तदरीस प्रतिष्टित अवार्ड दिया गया !

डा. हुस्न आरा राजकीय महाविद्यालय में उर्दू की व्याख्याता और विभागाध्यक्ष हैं साथ ही PhD गाइड भी हैं, और उनकी निगरानी में कई स्टूडेंट्स अपनी PhD मुकम्मल कर चुके हैं और कई कर रहे हैं !


डा. हुस्न आरा के कई रिसर्च पेपर्स इंटरनेशनल और नेशनल जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं, साथ ही उनकी कई किताबें भी प्रकशित हो चुकी हैं !


डा. हुस्न आरा को इस अवार्ड के तहत एक मोमेंटो राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एम.एन. भंडारी साहब के कर कमलों द्वारा प्रदान दिया गया, जबकि प्रमाणपत्र समारोह के मुख्य अतिथि माननीय खान एवं भूगर्भ विभाग मंत्री राजस्थान सरकार श्री सुरेन्द्रपाल टी.टी. जी द्वारा प्रदान किया गया !

साथ ही राजस्थान उर्दू अकादमी द्वारा सम्मान हेतु दिया गया शाल दूरदर्शन केंद्र के डायरेक्टर श्री रमेश शर्मा जी के कर कमलों द्वारा दिए गया, एवम etv और Zee टी.वी. राजस्थान की टॉक शो होस्ट डा. अनिता हाड़ा द्वारा फूलों का गुलदस्ता भेंट किया गया !


ज्ञातव्य रहे कि राजस्थान उर्दू अकादमी द्वारा 6 वर्ष के अंतराल के बाद ये प्रतिष्टित पुरस्कार समारोह आयोजित किया है !

.राजस्थान में उर्दू अदब के फ़रोग़ के लिए राजस्थान उर्दू अकादमी द्वारा अदीबों, शायरों मीडिया पर्सनालिटीज, और शिक्षा से जुड़े विद्वानों को और भी कई पुरस्कार दिए गए, ख़ुशी की बात यह रही कि इस समारोह में टोंक और कोटा का दबदबा देखने को मिला, जहाँ डा. हुस्न आरा खुद टोंक से ताल्लुक़ रखती हैं, वही टोंक से ही डा. सादिक़ अली को मौलाना एह्तेरामुद्दीन शाग़िल अवार्ड से नवाज़ा गया, टोंक के ही अज़ीज़ुल्लाह शीरानी साहब, इमदाद अली और मुख़्तार टोंकी को भी पुरस्कारों से नवाज़ा गया !

वहीँ उर्दू अकादमी का सबसे बड़ा प्रतिष्टित पुरस्कार 'महमूद शीरानी अवार्ड' उर्दू अदब की जानी मानी शख्सियत डा. फ़ारूक़ बख्शी साहब को प्रदान किया गया, डा. फ़ारूक़ बक्शी साहब कोटा से ही हैं, और आजकल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में उर्दू के प्रोफ़ेसर और विभागाध्यक्ष हैं उनके तीन काव्य संग्रह 'पलकों के साये', उदास लम्हों के मौसम', और चाँद चेहरा सी एक लड़की प्रकाशित हो चुके हैं, साथ ही उर्दू तनक़ीद पर उनकी पांच किताबें भी प्रकाशित हो चुकी हैं !

इसके साथ ही कोटा शहर के ही डा. पुरषोत्तम यक़ीन को 'चाँद बिहारी लाल सबा' अवार्ड से नवाज़ा गया !

सबसे ख़ास और ख़ुशी की बात यह है कि राजस्थान उर्दू अकादमी के सचिव जनाब मोअज़्ज़म अली साहब की बेइंतेहा कोशिशों से ही ये समारोह मुमकिन हो सका, 6 साल बाद राजस्थान उर्दू अकादमी ने ये पुरस्कार समारोह आयोजित किया है, और इस बार उन्होंने राजस्थान के कोने कोने से उर्दू अदब के लिए बेलौस खिदमत करने वालों के साथ साथ उर्दू अदब के फ़रोग़ के लिए कोशिशों में लगे अदीबों, विद्वानों, शिक्षकों को एक मंच पर लाकर न सिर्फ इकठ्ठा कर ये सम्मान दिलाया बल्कि उर्दू अदब के लिए उनकी खिदमात को इस समारोह के ज़रिये आम लोगों तक पहुंचाया है !

उर्दू अदब की इस शानादार महफ़िल को कामयाब बनाने के लिए राजस्थान उर्दू अकादमी के सचिव जनाब मोअज़्ज़म अली साहब की अथक मेहनत और उर्दू अदब से उनके लगाव के जज़्बे को तहे दिल से सलाम और मुबारकबाद ! 

राजस्थान उर्दू अकादमी के सचिव जनाब मोअज़्ज़म अली साहब की इस मुहीम में उनके साथ रह कर उर्दू अदब के फ़रोग़ के लिए उन्हें हर मुमकिन मदद और हौंसला दिया राजस्थान उर्दू अकादमी के चेयरमैन जनाब अशरफ अली खिलजी साहब ने, इन दोनों हज़रात की कोशिशों की बदौलत जयपुर में राजस्थान उर्दू अकादमी के बैनर तले अदीबों की इस महफ़िल में उर्दू मुस्कुराती नज़र आयी !!